दूसरी सरकारी भाषा के दर्जा प्राप्त होने के बावजूद नीतिश सरकार में उर्दू भाषा का विकास नहीं हुआ – क्यामुद्दीन अंसारी
अरवल: आज अरवल में इंसाफ मंच अरवल जिला कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता इंसाफ मंच के राज्य कमेटी सदस्य और जिला सचिव शाह शाद ने की। इस बैठक में 2 मार्च 2025 को आयोजित होने वाली ‘बदलो बिहार महाजुटान’ रैली की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई और इंसाफ पसंद लोगों को गोलबंद करते हुए इस रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने का निर्णय लिया गया।
बैठक में उर्दू भाषा के विकास के मुद्दे और कब्रिस्तान की घेराबंदी पर नीतिश-भा.ज.पा. सरकार की लापरवाही की कड़ी आलोचना की गई।
इंसाफ मंच के राज्य सचिव क्यामुद्दीन अंसारी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “उर्दू भाषा बिहार की दूसरी सरकारी भाषा है, लेकिन नीतिश-भा.ज.पा. के 20 वर्षों के शासन में उर्दू भाषा के विकास में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। एनआरसी, सीएए, एनपीआर के बाद ट्रिपल तलाक, कॉमन सिविल कोड और वक्फ कानून में संशोधन की कोशिशें की जा रही हैं। मैंने अल्पसंख्यक और दलित समाज से अपील की है कि उन्हें अपने हक, न्याय और इंसाफ के लिए महाजुटान में शामिल होना होगा। भाकपा माले की ‘बदलो बिहार महाजुटान’ रैली 2 मार्च को पटना के गांधी मैदान में आयोजित हो रही है, जिसमें इंसाफ मंच के बैनर तले न्याय पसंद लोग शामिल होंगे।”
अरवल के विधायक कॉमरेड महानंद सिंह ने भी बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “नीतिश सरकार बिहार के सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में उर्दू भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति करने में पूरी तरह विफल रही है। 2014 के बाद से लगातार अल्पसंख्यक समाज पर हमले बढ़े हैं और हाल ही में मोदी सरकार वक्फ बोर्ड पर नया कानून बनाने की कोशिश कर रही है, जो पहले के सभी प्रावधानों को खत्म करने की योजना है और अल्पसंख्यक समाज की जमीनों को छीनने की साजिश हो रही है। इसके अलावा, गरीब, दलित और पिछड़े समाज के लोगों को सर्वे के नाम पर उनकी जमीनों से बेदखल करने की योजना बनाई जा रही है।”
महानंद सिंह ने आगे कहा, “नीतिश-भा.ज.पा. राज में 2019 के बाद कब्रिस्तान की घेराबंदी के लिए कोई प्राथमिकता सूची नहीं बनाई गई, जो इस सरकार के अल्पसंख्यक विरोधी चरित्र को उजागर करता है। हम और हमारे पार्टी भाकपा माले के विधायक साथी कब्रिस्तान की घेराबंदी, उर्दू शिक्षकों की बहाली, उर्दू अनुवादकों की बहाली, वक्फ कानून की समाप्ति और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार विधानसभा और सड़कों पर संघर्ष करते रहे हैं।”
बैठक को भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य रविंद्र यादव और इंसाफ मंच के राज्य कमेटी सदस्य और जिला अध्यक्ष वाहिद अंसारी ने भी संबोधित किया।
बैठक में शाह फ़राज़, सरफराज आलम, शहाबुदीन अंसारी, सलीम खान, अरमान आलम, एजाज आलम, शाहबाज मलिक, अकरम अंसारी, चांद मलिक, योगेंद्र दास, बैजनाथ प्रसाद, रामजी, सहेंद्र कुमार, महेंद्र कुमार समेत कई लोग शामिल थे।